(वैशाली में पुलिस छापेमारी के दौरान जब्ती में अनियमितता का आरोप, SHO और SI पर एफआईआर के आदेश Corrupt police officer in uniform in Bihar ,Bihar Police Seizure Case: DIG Orders FIR Against SHO and Sub-Inspector Over Alleged Misappropriation)
वैशाली/पटना: बिहार पुलिस के भीतर एक गंभीर अनुशासनात्मक और आपराधिक मामले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। तिरहुत रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) चंदन कुमार कुशवाहा ने वैशाली जिले के लालगंज थाना क्षेत्र में तैनात थानाध्यक्ष (SHO) और एक सब-इंस्पेक्टर (SI) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। दोनों अधिकारियों पर छापेमारी के दौरान कथित रूप से जब्त की गई भारी मात्रा में नकदी और आभूषणों को आधिकारिक अभिलेखों में दर्ज न करने और उनका दुरुपयोग करने का गंभीर आरोप है।(Corrupt police officer in uniform in Bihar)
30 दिसंबर की छापेमारी से जुड़ा मामला
यह मामला 30 दिसंबर का बताया जा रहा है, जब लालगंज थाना पुलिस ने थानाध्यक्ष संतोष कुमार और सब-इंस्पेक्टर सुमनजी झा के नेतृत्व में थाना क्षेत्र के बिलनपुर गांव में रामप्रीत सहनी के आवास पर छापेमारी की थी। पुलिस द्वारा तैयार की गई आधिकारिक जब्ती सूची में केवल सीमित वस्तुओं का उल्लेख किया गया था।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, छापेमारी के दौरान तीन टेलीविजन, दो जिंदा कारतूस, एक खाली खोखा और कुछ तांबे के बर्तन जब्त किए गए थे। इसी कार्रवाई के दौरान रामप्रीत सहनी की पत्नी को हिरासत में लेकर गिरफ्तार भी किया गया था।(Corrupt police officer in uniform in Bihar)
जांच में सामने आए गंभीर आरोप
हालांकि, बाद में हुई विभागीय जांच में यह आरोप सामने आया कि छापेमारी के दौरान पुलिस टीम को इन वस्तुओं के अलावा भी बड़ी मात्रा में नकदी और बहुमूल्य धातुएं मिली थीं, जिन्हें जब्ती सूची में शामिल नहीं किया गया। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कथित तौर पर करीब 50 लाख रुपये नकद, लगभग 2 किलोग्राम सोना और 6 किलोग्राम चांदी बरामद हुई थी, लेकिन इनका उल्लेख किसी भी आधिकारिक दस्तावेज में नहीं किया गया।
इसके अलावा, नियमों के तहत अनिवार्य मानी जाने वाली जब्ती प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी नहीं कराई गई थी, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया।(Corrupt police officer in uniform in Bihar)
SDPO और SP की जांच से हुआ खुलासा
लालगंज के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) गोपाल मंडल को जब्ती सूची में संभावित अनियमितता की गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी। उन्होंने तत्काल इस सूचना से वैशाली के पुलिस अधीक्षक (SP) ललित मोहन शर्मा को अवगत कराया।
एसपी के निर्देश पर कराई गई प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर तिरहुत रेंज के डीआईजी को भेजी गई। रिपोर्ट के आधार पर डीआईजी ने संबंधित थानाध्यक्ष और सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया।(Corrupt police officer in uniform in Bihar)
निलंबन के बाद एफआईआर की कार्रवाई
जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद दोनों आरोपित पुलिस अधिकारियों को 4 जनवरी को ही निलंबित कर दिया गया था। पुलिस अधीक्षक ने इस मामले को विभागीय छवि के लिए गंभीर बताते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं पुलिस की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाती हैं और इन्हें किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।(Corrupt police officer in uniform in Bihar)
सब-इंस्पेक्टर का पूर्व रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी सब-इंस्पेक्टर सुमनजी झा का नाम पहले भी विवादों से जुड़ चुका है। वर्ष 2024 में मुजफ्फरपुर में तैनाती के दौरान उन्हें विजिलेंस ब्यूरो ने कथित रूप से 11,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।
वह मामला वर्तमान में न्यायालय में लंबित है। इसके बावजूद, ताजा आरोपों ने उनके आचरण और कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।(Corrupt police officer in uniform in Bihar)
प्रशासन की सख्त प्रतिक्रिया
पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाएगी। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल व्यक्तिगत अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पुलिस तंत्र में जवाबदेही और निगरानी तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।(Corrupt police officer in uniform in Bihar)
पुलिस सुधार और पारदर्शिता पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर पुलिस छापेमारी और जब्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, दस्तावेजीकरण और निगरानी की जरूरत को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी निगरानी, अनिवार्य वीडियोग्राफी और स्वतंत्र ऑडिट जैसे उपायों से इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है।
फिलहाल, डीआईजी के आदेश के बाद एफआईआर दर्ज होने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और आगे की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जाएगी।(Corrupt police officer in uniform in Bihar)
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